43.8c नई दिल्ली, भारत, बुधवार, जून १०, २०२६
Breaking News
Top Stories Supreme Court
Political NEWS Legislative Corner Celebstreet International Videos
Subscribe Contact Us
close
Judiciary

सुप्रीम कोर्ट में याचिका, फर्जी लॉ डिग्री और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अभियान की CBI जांच की मांग

By Saket Sourav      27 May, 2026 12:14 PM      0 Comments
सुप्रीम कोर्ट में याचिका फर्जी लॉ डिग्री और कॉकरोच जनता पार्टी अभियान की CBI जांच की मांग

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें कथित फर्जी वकीलों और फर्जी लॉ डिग्री मामलों की CBI जांच की मांग की गई है। साथ ही, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की “कॉकरोच” टिप्पणी को वायरल कर उसके कथित व्यावसायिक इस्तेमाल और “Cockroach Janta Party” अभियान की भी जांच की मांग की गई है। याचिका में साफ कहा गया है कि यह व्यंग्य, लोकतांत्रिक असहमति या संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं है, बल्कि अदालत की मौखिक टिप्पणियों को संदर्भ से अलग करके सोशल मीडिया पर एल्गोरिद्म के जरिए फैलाने और उससे पैसे कमाने के खिलाफ है।

यह याचिका अधिवक्ता राजा चौधरी द्वारा 24 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई। इसमें दो मुख्य मुद्दों पर CBI जांच की मांग की गई है—पहला, फर्जी लॉ डिग्री और गलत तरीके से वकालत कर रहे लोगों की जांच; और दूसरा, “Cockroach Janta Party” नाम के ऑनलाइन अभियान और उससे जुड़े लोगों की गतिविधियों की जांच।

यह मामला 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई से जुड़ा है, जहां वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम, अदालतों के दुरुपयोग और कानूनी पेशे में गिरते स्तर पर चर्चा के दौरान CJI सूर्यकांत ने “कॉकरोच” शब्द का इस्तेमाल किया था। बाद में उन्होंने साफ किया कि उनकी टिप्पणी बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं, बल्कि फर्जी डिग्री और गलत तरीकों से पेशे में आने वाले लोगों के लिए थी। हालांकि, सोशल मीडिया पर यह टिप्पणी अलग संदर्भ में तेजी से वायरल हो गई।

इसके बाद “Cockroach Janta Party” नाम से एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान शुरू हुआ, जिसे कथित तौर पर बोस्टन, अमेरिका निवासी अभिजीत दिपके ने शुरू किया। यह अभियान सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर तेजी से लोकप्रिय हुआ और बेरोजगारी, संस्थाओं की जवाबदेही और मीडिया की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर टिप्पणी करने लगा। इसके बाद इससे जुड़े मर्चेंडाइज, ऑनलाइन कैंपेन और कई याचिकाएं भी सामने आईं।

याचिका में कहा गया है कि उसका उद्देश्य व्यंग्य या सरकार और न्यायपालिका की आलोचना पर रोक लगाना नहीं है। बल्कि, अदालत की मौखिक टिप्पणियों को काट-छांटकर वायरल करना, मीम बनाना, उनका व्यावसायिक इस्तेमाल करना, ट्रेडमार्क और मर्चेंडाइज के जरिए पैसे कमाना, और उन्हें संदर्भ से हटाकर सोशल मीडिया एल्गोरिद्म के जरिए फैलाना एक अलग और गंभीर कानूनी मुद्दा है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अदालत की टिप्पणियों से कमाई करना, क्लिप्स को वायरल करना और न्यायिक टिप्पणियों को व्यावसायिक उत्पाद में बदलना ऐसे मामले हैं, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अदालत की अवमानना से जुड़े कानून, बौद्धिक संपदा अधिकार और न्यायपालिका की गरिमा आपस में टकराते हैं।

याचिका का दूसरा हिस्सा फर्जी वकीलों और फर्जी लॉ डिग्री रखने वालों के खिलाफ CBI जांच की मांग से जुड़ा है। इसमें कहा गया है कि बिना वैध नामांकन या जाली डिग्री के आधार पर वकालत करने वालों का मुद्दा लंबे समय से बार काउंसिल और अदालतों के लिए चिंता का विषय रहा है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि अलग-अलग राज्यों की कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय इस मामले की केंद्रीकृत CBI जांच कराई जाए।

केस विवरण
याचिकाकर्ता: अधिवक्ता राजा चौधरी
न्यायालय: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
दायर करने की तारीख: 24 मई 2026



Share this article:

About:

Saket is a law graduate from The National Law University and Judicial Academy, Assam. He has a keen ...Read more

Follow:
Linkedin


Leave a feedback about this
TRENDING NEWS


TOP STORIES


ADVERTISEMENT


Join Group

Signup for Our Newsletter

Get Exclusive access to members only content by email