38.6c नई दिल्ली, भारत, बुधवार, जून १०, २०२६
Breaking News
Top Stories Supreme Court
Political NEWS Legislative Corner Celebstreet International Videos
Subscribe Contact Us
close
Judiciary

छोटे कर्जदारों से सख्ती, बड़े डिफॉल्टरों पर नरमी? सुप्रीम कोर्ट ने SBI को लगाई फटकार

By Saket Sourav      23 May, 2026 01:38 PM      0 Comments
छोटे कर्जदारों से सख्ती बड़े डिफॉल्टरों पर नरमी सुप्रीम कोर्ट ने SBI को लगाई फटकार

नई दिल्ली: Supreme Court of India ने एक मामले की सुनवाई के दौरान बैंकों के रवैये पर नाराज़गी जताई। कोर्ट ने कहा कि बैंक बड़े कारोबारियों को करोड़ों के लोन आसानी से दे देते हैं, लेकिन आम लोगों को छोटा पर्सनल लोन लेने में भी बहुत परेशान किया जाता है। कई बार उनसे इतनी कागजी प्रक्रिया कराई जाती है कि वह परेशान हो जाते हैं।

यह टिप्पणी जस्टिस Ahsanuddin Amanullah और जस्टिस R. Mahadevan की बेंच ने की।

मामला एक कंपनी “भास्कर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड” से जुड़ा था। कंपनी ने साल 2019 में State Bank of India (SBI) से करीब 8.09 करोड़ रुपये का लोन लिया था। लेकिन कंपनी ने पहली किस्त तक नहीं चुकाई। इसके बाद बैंक ने खाते को NPA यानी खराब लोन घोषित कर दिया।

बैंक ने कंपनी की संपत्ति अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू की। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने भी प्रशासन को आदेश दिया था कि कंपनी की संपत्ति का कब्जा SBI को दिया जाए। इसी आदेश को कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

कंपनी की तरफ से कहा गया कि बैंक ने बहुत जल्दी खाते को NPA घोषित कर दिया। साथ ही कंपनी ने यह भी कहा कि वह मूल रकम लौटाने को तैयार है और अगर थोड़ा समय मिले तो कारोबार दोबारा शुरू कर सकती है।

वहीं SBI की तरफ से कहा गया कि कंपनी ने करोड़ों का लोन लिया लेकिन एक भी किस्त नहीं चुकाई, इसलिए उसे राहत नहीं मिलनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

  • कंपनी ने पहली ही किस्त नहीं चुकाई, यह गंभीर बात है।
  • 6 साल बाद सिर्फ मूल रकम लौटाने की बात करना बहुत देर से लिया गया कदम है।
  • कंपनी कोर्ट का इस्तेमाल सिर्फ समय लेने के लिए करती दिख रही है।

हालांकि कोर्ट ने SBI पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई कंपनी पहली किस्त भी नहीं चुका पाती, तो इसका मतलब है कि बैंक अधिकारियों ने लोन देने से पहले उसकी आर्थिक स्थिति की सही जांच नहीं की।

कोर्ट ने कहा कि आजकल बड़े लोगों को बड़े लोन आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन आम आदमी को छोटे लोन के लिए भी बहुत चक्कर लगाने पड़ते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को बैंकिंग व्यवस्था में ज्यादा राहत और सुविधा मिलनी चाहिए।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की याचिका खारिज कर दी। लेकिन कंपनी को दो हफ्ते का समय दिया ताकि वह DRT (डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल) में अपनी राहत की मांग फिर से रख सके। इस दौरान SBI को भी कोई सख्त कार्रवाई न करने को कहा गया।

मामले का नाम 
M/s Bhaskar International Private Limited & Ors. v. State Bank of India & Ors.



Share this article:

About:

Saket is a law graduate from The National Law University and Judicial Academy, Assam. He has a keen ...Read more

Follow:
Linkedin


Leave a feedback about this
TRENDING NEWS


TOP STORIES


ADVERTISEMENT


Join Group

Signup for Our Newsletter

Get Exclusive access to members only content by email