भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी और कूटनीतिक क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। प्रख्यात भारतीय विधिवेत्ता प्रोफेसर डॉ. बिमल एन. पटेल को इंटरनेशनल ट्राइब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (ITLOS) का न्यायाधीश निर्वाचित किया गया है — यह संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत काम करने वाली वह सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जो दुनिया भर में समुद्री सीमाओं, नौवहन अधिकारों, समुद्री संसाधनों के दोहन और सागर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों का निपटारा करती है। जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में स्थित इस ट्राइब्यूनल में डॉ. पटेल का कार्यकाल 2026 से 2035 तक, यानी पूरे नौ वर्षों का रहेगा।
कैसे हुआ चुनाव
यह चुनाव 15 से 19 जून 2026 के बीच अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित हुए UNCLOS (संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि) के 36वें सम्मेलन में हुआ। इस संधि से जुड़े कुल 172 सदस्य देशों में से 168 देशों ने वोटिंग में हिस्सा लिया। इस कड़े मुकाबले में डॉ. बिमल पटेल को 115 वोट मिले, जो उनकी निर्णायक और स्पष्ट जीत को दर्शाता है। इस चुनाव में कुल सात न्यायाधीशों को 2026-2035 के कार्यकाल के लिए चुना गया, जिनमें भारत के अलावा वियतनाम, घाना, ट्यूनीशिया, रूस, नीदरलैंड्स और ब्राजील के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। डॉ. पटेल 1 अक्टूबर 2026 को औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभालेंगे और भारत की मौजूदा प्रतिनिधि नीरू चड्ढा का स्थान लेंगे, जिनका नौ वर्षों का कार्यकाल इसी वर्ष सितंबर में पूरा हो रहा है।
कौन हैं डॉ. बिमल पटेल
डॉ. बिमल एन. पटेल अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री कानून के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक जाने-माने शिक्षाविद, न्यायविद और प्रशासक हैं। वे इस समय संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठित इंटरनेशनल लॉ कमीशन के सदस्य हैं और स्टेट रेस्पॉन्सिबिलिटी से जुड़े 'सक्सेशन ऑफ स्टेट्स' कार्यसमूह के अध्यक्ष भी हैं। इसके साथ ही वे गुजरात स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति और सार्वजनिक अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर हैं। एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के तौर पर वे प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत आने वाली नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट की नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य भी हैं — जिससे स्पष्ट होता है कि उन्हें कानूनी दृष्टिकोण के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की भी गहरी समझ है।
अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों की बात करें तो डॉ. पटेल ने नीदरलैंड्स की विश्वप्रसिद्ध लीडेन यूनिवर्सिटी और जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी, दोनों जगह से अंतरराष्ट्रीय कानून में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है। इससे पहले वे गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के निदेशक और भारत के 21वें विधि आयोग के सदस्य के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उनका करीब 15 वर्षों का अनुभव नीदरलैंड्स के द हेग शहर में स्थित संयुक्त राष्ट्र और रासायनिक हथियार निषेध संगठन (OPCW) जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक संस्थाओं में काम करने का भी रहा है।
भारत की निरंतर उपस्थिति बरकरार
इस चुनाव की एक खास बात यह भी है कि इससे ITLOS में भारत का प्रतिनिधित्व निरंतर बना रहेगा। गौरतलब है कि नीरू चड्ढा भारत की पहली महिला ITLOS न्यायाधीश रह चुकी हैं और पूरे ट्राइब्यूनल के इतिहास में सिर्फ दूसरी महिला न्यायाधीश बनने का गौरव भी उन्हें हासिल है। वे अक्टूबर 2017 से इस ट्राइब्यूनल की सदस्य रही हैं और अक्टूबर 2023 से इसकी उपाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में डॉ. पटेल का चुना जाना भारत की वैश्विक समुद्री कानून व्यवस्था में लगातार बनी हुई मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
क्यों है यह उपलब्धि खास
ITLOS की स्थापना 1996 में 1982 की संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत की गई थी, जो 1994 में लागू हुई थी और अब तक 172 देश इसके सदस्य बन चुके हैं। यह ट्राइब्यूनल 21 स्वतंत्र न्यायाधीशों से मिलकर बनता है, जिन्हें गुप्त मतदान के जरिए चुना जाता है। भौगोलिक संतुलन बनाए रखने के लिए इसकी सीटें पांच क्षेत्रीय समूहों में बांटी गई हैं — अफ्रीका से 5, एशिया से 5, लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों से 4, पश्चिमी यूरोप और अन्य देशों से 4, तथा पूर्वी यूरोप से 3 सीटें निर्धारित हैं। यह ट्राइब्यूनल समुद्री सीमाओं के निर्धारण, नौवहन के अधिकारों, समुद्री जीव-संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन, समुद्री पर्यावरण की रक्षा तथा वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े जटिल विवादों की सुनवाई करता है।
आज के समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है, दक्षिण चीन सागर को लेकर कई देशों के बीच गंभीर विवाद बने हुए हैं, और गहरे समुद्र में खनन जैसे नए और संवेदनशील मुद्दे वैश्विक बहस का हिस्सा बन रहे हैं — ऐसे नाजुक दौर में डॉ. पटेल का इस प्रतिष्ठित ट्राइब्यूनल में चुना जाना भारत को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून व्यवस्था के निर्माण में एक मजबूत और प्रभावशाली आवाज़ प्रदान करता है।
सरकार और कूटनीतिक हलकों में खुशी
इस चुनाव परिणाम पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर डॉ. पटेल को बधाई देते हुए लिखा, "बधाई हो डॉ. बिमल पटेल! UNCLOS के सदस्य देशों का उनके समर्थन के लिए दिल से आभार।" वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस जीत को "एक महत्वपूर्ण उपलब्धि" करार दिया और कहा कि सभी सदस्य देशों ने भारत पर जो भरोसा जताया है, उसके लिए मंत्रालय आभारी है। न्यूयॉर्क स्थित भारत के स्थायी मिशन ने भी एक बयान जारी करते हुए कहा कि डॉ. पटेल का यह चुनाव बहुपक्षवाद और समुद्री कानून के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है। भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने भी डॉ. पटेल को बधाई देते हुए पिछले एक साल से इस उम्मीदवारी के लिए काम कर रही भारतीय राजनयिक टीम के प्रयासों की सराहना की।
गौरतलब है कि भारत 1995 से ही UNCLOS का हस्ताक्षरकर्ता देश रहा है और नियम-आधारित समुद्री शासन व्यवस्था, महासागरों से जुड़े विवादों के शांतिपूर्ण समाधान तथा बहुपक्षीय सहयोग का समर्थक रहा है। ऐसे में डॉ. बिमल पटेल की यह ऐतिहासिक नियुक्ति न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख, उसकी कानूनी विशेषज्ञता और समुद्री कूटनीति में उसकी सक्रिय भूमिका का एक स्पष्ट प्रमाण भी है।



